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कोशला लिटरेचर फेस्टिवल-2 में जुटे नामचीन लेखक, बिखरे शास्त्रीय गायन के रंग

लखनऊ।लखनऊ के ला-मार्टीनियर ब्वायज़ कॉलेज में शुक्रवार (9 फरवरी) को ‘कोशल लिटरेचर फेस्टिवल’ के दूसरे संस्करण का आग़ाज़ हुआ। फेस्टिवल डायरेक्टर अमिताभ सिंह बघेल और संस्थापक प्रशांत कुमार सिंह ने अपरान्ह 2 बजे दीप प्रज्ज्वलित कर फेस्टिवल का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय यह फेस्टिवल 9 से 11 फरवरी तक आयोजित होगा।

उद्घाटन के बाद प्रशांत कुमार सिंह ने अपने बीज वक्तव्य में लिटरेचर फेस्टिवल और खासकर ‘कोशल’ शब्द के बारे में बताते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म विचारों के मंथन के लिए है। समुद्र मंथन से अमृत निकला था, विचारों के मंथन से विवेक, बुद्धि और समझ विकसित होती है। अमिताभ सिंह ने इस शेर के साथ अपनी बात शुरू की कि

ख़ुश-आमदीद वो आया हमारी चौखट पर,

बहार जिस के क़दम का तवाफ़ करती है।

केएलएफ साहित्य, संस्कृति, मानवीय मूल्यों का एक उत्सव है। रीडिंग एंड क्रिएटिव आर्ट खुशियों के बायस हैं। किसी महोत्सव को ये महत्वपूर्ण बनाते हैं।

उद्घाटन के बाद सत्र का सिलसिला शुरू हुआ। प्रथम सत्र में ला-मार्टीनियर ब्वायज़ कॉलेज के प्रिंसिपल सी. मैकफारलैण्ड ने ’लीगेसी ऑफ ला मार्टीनियर क्लाउड मार्टिन एण्ड कान्स्टैण्टिया’ विषय पर अपना विचार रखा। इस दौरान उन्होंने कॉलेज की स्थापना का नोबेल थोट बताते हुए क्लाड मार्टिन की चर्चा की और कहा कि मार्टिन ने समाज के वंचित तबके के बच्चों के लिए इस कॉलेज की स्थापना की।

दूसरे सत्र में सत्य सरन का ’फोर इण्टर कनेक्टेड लाइव्स’ पर व्याख्यान हुआ। उन्होंने गुरुदत्त, जगजीत सिंह, हरि प्रसाद चौरसिया और एस डी बर्मन जैसी शख्सियत के मिजाज और उनसे जुड़े दिलचस्प किस्सों पर बात की।

तीसरे सत्र में गुरचरन दास व जान ज़ुब्र्स्की से ‘रेलिक्स एंड रेमिनेसेस ऑफ प्रिंसली इंडिया’ विषय पर अली महमूदाबाद की बातचीत का दौर चला। ज़ुब्र्स्की ने कहा कि नेहरु और बल्लभ भाई पटेल ने देश के तमाम रजवाड़ों का एकीकरण करके आजादी के आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। गुरचरन दास ने कहा- चाइना हैड ए स्ट्रांग स्टेट बट ए वीक सोसाइटी, इण्डिया हैड ए वीक स्टेट बट ए स्ट्रांग सोसाइटी। वहीं अली महमूदाबाद ने इंडिया को ‘लैंड ऑफ़ संगम’ बताया।

आखिरी सत्र ‘सुर संगम’ के नाम रहा, जिसके तहत हांगकांग से शिरकत करने आए रामपुर सहसवान घराने के फ़नकार उस्ताद ग़ुलाम सिराज नियाज़ी का दिल को छू लेने वाला गायन हुआ। उन्होंने जब गाया- ‘सैयां मोरा परदेश गईल बा’ तो वहां एक जादू भरा समा बंध गया। ग़ज़ल- ‘दिल ये कहता है तुम्हें ताजमहल कह डालूँ……’ ने जवां दिलों में गुदगुदी पैदा की। इसके अलावा नियाजी साहब ने शास्त्रीय रागों पर आधारित कई खयाल और ग़ज़लें गाई।

इन कार्यक्रमों के अलावा ‘टेक द स्टेज’ श्रेणी के तहत कविताओं, गजलों, नुक्कड़ नाटक, म्यूजिक बैंड परफोर्मेंस का भी एक शानदार सत्र चला। फ़ेस्टिवल को रेड एफएम के आरजे तुषार और और आरजे तन्वी ने होस्ट किया।

‘कोशल लिटरेचर फेस्टिवल’ में 9,10 और 11 फरवरी को विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित होंगे, जिसमें जान ज़ुब्र्स्की, मुजफ्फर अली, तिग्मांशु धूलिया, गुरचरन दास, शरद बिंदल, सत्य सरन, पुष्पेश पंत, चन्द्र शेखर वर्मा, हिमांशु बाजपेयी सौरभ द्विवेदी जैसी मशहूर हस्तियां शामिल होंगी। इसके साथ ही म्यूजिकल नाइट और मुशायरा जैसे प्रोग्राम भी होंगे।

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