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महाराष्ट्र में मिला 170 साल पहले हुई शादी का 40 फुट लंबा बिल, पाई-पाई का ब्योरा

मुंबई। बात एक ऐसी शादी की जो करीब 170 साल पहले हुई थी. इस शादी का पूरा खर्च 40 फुट लंबे बिल पर लिखा गया है. इसमें छोटी से छोटी खरीद से लेकर सब्जी और चावल किसने पकाए, इसका भी पूरा ब्यौरा दिया गया है. शादी पर कुल खर्च आया था 1811 रुपए लेकिन 170 साल पहले के इस खर्च को आज के संदर्भ में देखें तो ये रकम करोड़ों में हो जाती है. 40 फुट लंबा शादी का ये बिल मुंबई के पास वसई में पुरानी चीजों को इकट्ठा करने के शौकीन व्यक्ति के पास मिला है.  ये बिल हाथ से मोदी लिपि यानी मार्डन मराठी स्क्रिप्ट में लिखा गया है. ये दस्तावेज पुणे के वामन विनायक पंडित चिंतामणि के बेटे और सांगली के मिरज की रहनेवाली दुल्हन की शादी का  दस्तावेज है.

आने और पाई में लिखा गया है 40 फुट लंबे इस बिल मे हिसाब
प्रवीण कुलकर्णी प्राचीन वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाते है और उसके बारे मे लोगो को बताने का काम करते हैं. कुछ दिनों पहले जब उन्होंने पालघर मे प्राचीन वस्तुओ की प्रदर्शनी लगाई तो वहा पर आए एक शख्स ने उन्हे ये 40 फुट लंबा  बिल दिया. पहले तो उन्होंने इसपर ध्यान नही दिया लेकिन जब उन्होंने उसका अध्ययन किया तो पता चला कि ये एक शादी को लेकर की गई तैयारियां और उसमें होनेवाले खर्च का ब्यौरा हैं.  प्रवीण का कहना है कि 40 फुट के इस बिल को मोदी लिपि मे लिखा गया है जो आज की मार्डन मराठी है.

ऐसे में पता चलता है कि उस समय के लोग कितना आगे की सोचते थे. इस लिपि को देखने के बाद इतिहासकार कहते है राजाओं और नेताओं के बारे में तो ऐतिहासिक जानकारी काफी मिल जाती है लेकिन किसी शादी में होनेवाले खर्च का इस तरह का हिसाब किताब पहली बार देखने को मिला ह.

छोटे-छोटे खर्च का है ब्योरा
एक संस्था ने यह दस्तावेज लाकर दिया और बताया की अगर आप इसका अध्ययन करना चाहे तो कर सकते है अध्ययन के दौरान इन्हे पता चला की यह एक शादी में होने वाली खर्च के बारे में बताई गई सूची है जिसमें शादी के छोटे से छोटे खर्च से लेकर शादी के बड़े से बड़े खर्च के बारे में बताया गया है. इसमें शादी में इस्तेमाल होने वाली महिलाओ के चूड़ी से लेकर साडी के बारे में बताया है और पुरषों के लिए धोती से लेकर कुर्ते के बारे में बतया है और साथ ही साथ खाने में इस्तेमाल होने वाली छोटी से छोटी सामग्री जैसे हल्दी से लेकर धनिया तक का जिक्र है. इसके साथ ही इस लिस्ट में श्रृंगार में इस्तेमाल की जाने वाले सोने के आभूषण के बारे में भी बताया है. यहां तक की किस-किस को कौन कौन सा काम सौपा है यह भी बताया गया है.

यह जो कुंडली है यहा करीब 40 फुट लंबी है. कुंडली में जो कुल खर्च बताया गया है वह 1811 रुपये बताया गया है. आज के दौर में इस खर्च की तुलना की जाए तो यह किसी शाही शादी पर होने वाले खर्च के बराबर है.

क्या कहना है इतिहासकारों का 
इतिहासकार श्रीदत्त राउत का कहना है कि  यह जो दस्तावेज है वह 18 वीं सदी में होनेवाली सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियो पर प्रकाश डालता है. यह आज की पीढ़ी के लिए बहुत ही उपयोगी है.  इसमें इस्तेमाल किये जाने वाले सभी शब्द और वस्तु ऐसे है जो आज की तारीख में इस्तेमाल ही नहीं किये जाते. खासकर इससे यह भी पता चलता है कि पहले शादी कैसे की जाती थी , और समाज में इसका क्या महत्व होता है यह भी बताया गया है.

विष्णु प्रिय कुलकर्णी ने बताया कि यह कुंडली या सूची हमें हमारी पालघर की एक मंडली से मिला है. जिनकी तरफ से हम कई प्रदर्शन में भी हिस्सा लेते है. वह सभी जानते है की हम पुरानी चीज़ों का बहुत बारीकी से अध्ययन करते है.  जैसे की हमने पुराने किलो का अध्यन किया है और मोदी लिपि के भी अध्यन होते है. यह दस्तवेज हमारी संस्था को मिलना बहुत ही बड़ी बात है. क्यूंकि इसका कागज़ जो है वह हैंडमेड कागज़ है और स्याही कुदरती तौर पर पेड-पौधों से तैयार की गई है.

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