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आश्रय गृह नहीं यातना गृह था पटना का ‘आसरा’ शेल्टर होम!

नई दिल्ली। अभी बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम की बदनामी का दाग सरकार के दामन से छूटा भी नहीं कि पटना के आसरा शेल्टर होम की शर्मिंदगी ने महीने भर के अंदर फिर से पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया. दरअसल, पटना के आसरा शेल्टर होम से 10 अगस्त को कुछ महिलाओं ने भागने की कोशिश की, पर नाकाम रहीं. इसके बाद उसी रात शेल्टर होम की दो महिलाएं मुर्दा पाई जाती हैं. अब दो महिलाओं की संदिग्ध मौत के बाद जब उसकी संचालिका और मालिक को पुलिस गिरफ्तार करती है. तब सामने आता है सियासत के गलियारे में उनके रुसूख का वो सच जिसने बिहार की राजनीति में फिर भूचाल ला दिया है.

प्रभावशाली लोगों से संबंध

उसकी मुस्कुराती हुई तस्वीर में बिहार में राजनीति के सबसे बड़े फरेब की खोज जारी है. उसकी सोहबत के मुरीदों की खोज शुरु हुई तो ऐसे-ऐसे चेहरे सामने आने लगे कि लोगों की जुबानें खुली की खुली रह गईं. दरअसल, आसरा शेल्टर होम की संचालिका मनीषा दयाल बिहार की गलाकाट राजनीति में दलीय द्वेष का पुल थी. आरजेडी के श्याम रजक उसके लिए पलक पांवड़े बिछाए रहते थे तो मृत्युंजय तिवारी के साथ भी उसका उठना बैठना था. पूर्व मंत्री शिवचरण दास भी उसके स्वागत में खड़े रहते थे.

बिहार में मनीषा का जलवा

बिहार में जलवा हुआ करता था मनीषा दयाल का. और होता भी कैसे नहीं. उसके लिए बड़े-बड़े मंत्री स्वागत में दस्तरख्वान सजाते थे. विपक्ष के माननीय भी उनकी समाजसेवा के पीछे लट्टू थे. और ये सिलसिला जारी ही रहता अगर पटना के आसरा होम से दो औरतों की लाशें न निकलतीं. और ये भेद न खुलता कि उनकी लाशों को जबरन ठिकाने लगाने की कोशिश हुई है.

कमाल के हैं ये डीएम साहब!

पटना में तैनात अजब-गजब शैली वाले कमाल के डीएम सदियों में कभी कभार अवतार लिया करते हैं. इतना कुछ हो जाने के बाद होश नहीं आया था कि चलें जरा जिले के शेल्टर होम्स की हालत देख लें. बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खासमखास अफसर हुआ करते हैं डीएम साहब. अब जब माथे पर सीएम का हाथ तो फिक्र की क्या बात. आराम से दफ्तर जाते, चाय-नाश्ता खाना करते. गप लड़ाते और आकर चैन से सो जाते. लेकिन इस नींद में शनिवार को उस वक्त खलल पड़ गया, जब आसरा शेल्टर होम की दो महिलाओं की संदिग्ध मौत हो गई. आसरा शेल्टर होम ने इसे निपटाने की कोशिश की और भेद खुल गया.

शेल्टर होम की संचालिका है मनीषा

आसरा शेल्टर होम के मालिकान की खोज शुरु हुई. पता चला मनीषा दयाल की माया है इसके पीछे. आसरा होम की सचिव हुआ करती हैं मनीषा दयाल. और मालिक हुआ करते हैं चिंरतन कुमार. नाम में ही चिंतन और ऊपर से चिरंतन. कौन क्या बिगाड़ता. रात-रातभर आसरा होम्स से लड़कियों के चीखने चिल्लाने की आवाजें आतीं थीं. वो दहशत में कांपतीं थी. लेकिन जुबान कोई नहीं खोलता था.

नहीं हुई लड़कियों की सुनवाई

लड़कियां जब चीखतीं तो पूरे मोहल्ले की नींद उचट जाती. लेकिन सरकार में सुनता कौन. क्योंकि नीतीश कुमार की पार्टी से लेकर तेजस्वी यादव तक की पार्टी में मनीषा दयाल की सेवा में तत्पर रहने वाले बड़े-बड़े नेता थे. तो सवाल उठाने वालों और जवाब देने वालों के बीच जज़्बात का पुल हुआ करती थी मनीषा दयाल. उसके परोपकार के कद्रदान उनके लिए लाइन से उठकर खड़े रहते थे.

बड़े बड़े नेता लगाते थे लाइन

मनीषा दयाल की जलवाफरोशी का अंदाजा इसी से लगाइए देखते ही देखते मनीषा दयाल ने स्वयंसेवी संस्थाओं की लाइन लगा दी थी. आसरा होम को चलाने वाले अनुमाया ह्यूमैन रिसोर्स फाउंडेशन के अलावा कम से कम 5 स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए वो सामाजिक उत्थान में लगी हुई थी. अब पुलिस पता लगा रही है कि आखिर मनीषा दयाल में ऐसी कौन सी नाय़ाब खूबी थी कि बड़े-बड़े नेता उनके सामने आते ही हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे.

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