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क्यों मोदी सरकार के न चाहने पर भी राजकोषीय घाटा तय लक्ष्य के पार पहुंच सकता है

नई दिल्ली। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष यानी 2018-19 में केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे के लिए निर्धारित लक्ष्य को पाने में असफल साबित हो सकती है. केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 फीसदी रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है. राजकोषीय घाटा सरकार को होने वाली आय और उसके खर्च के बीच का अंतर होता है. इसके अधिक होने से न सिर्फ महंगाई बढ़ने का खतरा होता है बल्कि कर्ज भी महंगा हो जाता है. यही वजह है कि सरकार अपने खर्च पर नियंत्रण और राजस्व में वृद्धि के जरिए इस घाटे को काबू में रखने का प्रयास करती है.

मिंट के मुताबिक मूडीज ने कहा है कि राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्य के पार जाने की मुख्य वजहें तेल की बढ़ती कीमतें और ब्याज दरों में हो रही बढ़ोतरी है. एजेंसी का यह भी कहना है कि कुछ वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें कम किए जाने और कृषि क्षेत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि भी सरकार पर राजकोषीय दबाव को बढ़ा सकती है.

मूडीज का कहना है कि अगर सरकार अपने खर्चों को कम करती है, तो भी इस घाटे को रोक पाना मुश्किल लगता है. वित्त वर्ष के अंत में लोकसभा चुनाव व कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. मूडीज का अनुमान है कि इन चुनावों में होने वाले भारी खर्चों की वजह से भी राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है.

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