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मध्य प्रदेश चुनाव 2018: जानिए BSP किस प्लान के दम पर जीतेगी 32 से ज्यादा सीटें

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही कांग्रेस को गठबंधन पर दांव देने वाली बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को उम्मीद है कि पार्टी इस बार चुनाव में शानदार प्रदर्शन करेगी. प्रदेश के मुख्य राजनीतिक दलों में जारी उठापटक और दल-बदल के बीच बीएसपी का दावा है कि पार्टी इस विधानसभा चुनावों में पहले की मुकाबले और अधिक मजबूत हुई है. दरअसल, ये दावा बीएसपी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार का. अहिरवार ने कहा कि मध्य प्रदेश में इस बार बीएसपी अपने 34 साल के इतिहास का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए कम से कम 32 सीटें जीतेगी. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में सत्ता की चाभी बीएसपी के पास रहेगी.

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बीएसपी के पास रहेगी सत्ता की चाभी
प्रदीप अहिरवार का मानना है कि प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नही मिलेगा. उन्होंने कहा, ”हम कम से कम 32 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे और सत्ता की चाभी बीएसपी के पास रहेगी. कुल मिलाकर 75 सीटों पर हमारी स्थिति पहले से बहुत अच्छी है.”  उन्होंने कहा, ”वर्ष 2003 में बीएसपी ने राज्य विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीती थीं, 2008 में सात और 2013 में चार सीटें जीती थीं. इस बार प्रदेश में 15 साल से सत्ता पर काबित बीजेपी के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर एवं दलित एकता के चलते हम अच्छी जीत की स्थिति में हैं.” उन्होंने कहा, ”लोकतंत्र में एक सीट लेने वाला निर्दलीय भी कभी-कभी मुख्यमंत्री बन जाता है. मैं तो कम से कम 32 सीटों पर बीएसपी की जीत की उम्मीद के साथ आपको यह बता रहा हूं. हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश की सत्ता की धुरी बसपा सुप्रीमो मायावती के आस-पास रहे, लेकिन यह तय है कि खंडित जनादेश आने पर हम बीजेपी को समर्थन नहीं करेंगे.”

इस बार केवल पांच जिलों तक ही नहीं रहेंगे सीमित- अहिरवार
उन्होंने बताया, ”पिछले चुनाव में प्रदेश के पांच जिलों मुरैना, रीवा, सतना, दतिया एवं ग्वालियर में बीएसपी का दबदबा था. इस बार भी इन जिलों की कुछ सीटों से हम जीतेंगे. इसके अलावा छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, श्योपुर, दमोह, कटनी, बालाघाट एवं सिंगरौली जिलों में भी पार्टी का खाता खुलने की पूरी उम्मीद है.” वर्ष 2008 के राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 8.97 प्रतिशत रहा था, जो 2013 में करीब ढाई प्रतिशत गिरकर 6.29 प्रतिशत रह गया. अहिरवार ने इस बार पार्टी को 10 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने का दावा किया.

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अधिकारों के प्रति जागरुक हुआ है दलित- बीएसपी
इसकी वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया, ”फिलहाल माहौल अलग है. दलित वर्ग अपने अधिकारों के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक है और अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए वह बसपा पर भरोसा करेंगे. राज्य में पिछले वर्ष के किसान आंदोलन के खिलाफ भाजपा सरकार ने जो कदम उठाए थे, उसकी वजह से किसान भी इस सरकार के खिलाफ हैं.”

मतदाताओं की नाराजगी के चलते शिवराज नहीं जा रहे बुधनी
प्रदेश में जबर्दस्त सत्ता विरोधी लहर का दावा करते हुए अहिरवार ने कहा कि पिछले 13 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी सरकार की हालत खराब है. चौहान दो सीटों से चुनाव लड़ने वाले हैं. चौहान जिस बुधनी विधानसभा सीट से जीतते हैं, वहां वह मतदाताओं की नाराजगी के चलते चुनाव सभा तक नहीं कर पा रहे हैं.” उन्होंने कहा कि हम पहली बार मध्य प्रदेश में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ना ही पार्टी का इतिहास रहा है.

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