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गढ़चिरौली में ही क्यों होते हैं नक्सली हमले?

नई दिल्ली। गढ़चिरौली देश का एक ऐसा इलाका है, जिसे लाल गलियारा (Red Corridor) में शामिल किया गया है. लाल गलियारा (Red Corridor) का मतलब है वो जगह जहां नक्सलवादी सबसे ज़्यादा सक्रिय हैं. गढ़चिरौली के लिए यह भी कहा जाता है कि यहां सरकार का नहीं बल्कि नक्सलवादियों का राज है. ये ऐसा घना जंगल है जिसे नक्सलवादियों का सबसे सुरक्षित अड्डा माना जाता है और यहां घुसना किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है. इस जिले की सीमाएं तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से सटी हुई हैं.

इस इलाके में नक्सली मौका मिलते ही घात लगाकर हमला कर देते हैं. वो ज़मीन में आईईडी (Improvised Explosive Device) लगाकार सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं.

80 के दशक में जब गढ़चिरौली में नक्सलवाद ने अपनी जड़ें फैलानी शुरू कीं, तो नक्सलियों ने ना सिर्फ सुरक्षा बलों को निशाना बनाया, बल्कि उन्होंने घने जंगलों और जंगली जानवरों को भी कमाई का ज़रिया बना लिया.
इस इलाके में अक्सर नक्सलवादी घने जंगलों के बीच या फिर छोटी-छोटी पहाड़ियों पर अपना अड्डा बनाते हैं. और इसीलिए उनतक पहुंचना आसान नहीं होता.

24 अप्रैल 2018 को यहां सुरक्षाबलों ने 37 नक्सलियों को मार गिराया था.  हमारे देश में ऐसे बुद्धिजीवियों और मीडिया के लोगों की संख्या काफी ज़्यादा है, जो कश्मीर में आतंकवादियों का समर्थन करते हैं और देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलवादियों का खुलकर पक्ष लेते हैं. जबकि ये दोनों ही बेहिचक निर्दोष लोगों और सुरक्षाबलों का खून बहाते हैं. लेकिन, अब ये स्थिति बदल रही है.

चाहे आतंकवादी हमला हो या नक्सली हमला…देश के दुश्मन हम पर छिपकर हमला करते हैं. और हम सामने से जवाब देते हैं. लेकिन ज़्यादातर मौकों पर हमारे जवानों को अपनी जान देनी पड़ती है. बात चाहे जम्मू-कश्मीर के उड़ी में हुए हमले की हो, पठानकोट हमले की हो, या फिर छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले की हो. हर बार भारत की आत्मा को घायल किया जाता है. और हम सिवाए कड़ी निन्दा के कुछ नहीं कर पाते. लेकिन ये एक सुखद संकेत है, कि इस बार कड़ी निन्दा नहीं, बल्कि कड़े कदम उठाए गए हैं. और ऐसा भविष्य में भी होते रहना चाहिए.

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