Tuesday , November 19 2019

कही-अनकही सचकही

पत्रकारिता के अंतिम पैगंबर रवीश जी के अंतरात्मा की आवाज: सुप्रीम कोर्ट बेवफा है!

रवीश जी को कौन नहीं जानता! पत्रकारिता की जगत का चमचमाता सितारा हैं, या कहिए कि सूर्य हैं। आप उन्हीं से पूछिए, वो बता देंगे आपको कि पत्रकारिता में उनको छोड़ कर अब कोई बचा नहीं है। ऐसा वो बार-बार कहते हैं, क्योंकि मूढ़ जनता मानने को तैयार ही नहीं ...

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सिर में संगीन, सीने पर गोली खाकर जो हुआ शहीद… बाल दिवस पर सबसे छोटे स्वतंत्रता सेनानी को सलाम (बाल दिवस पर विषेस)

पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने गुरुवार (14 नवंबर) को बाल दिवस के अवसर पर भारत के कई स्वतंत्रता सेनानियों में से सबसे कम उम्र के सेनानी की फ़ोटो शेयर की है। उन्होंने एक 12 वर्षीय बच्चे बाजी राउत की फ़ोटो शेयर की, जिनकी ब्रिटिश सैनिकों ने गोली मारकर हत्या कर ...

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एक संजय जिसके कारण बाला साहेब ने कुत्ता पालना छोड़ दिया, दूसरे ने उनके बेटे को धोबी का कुत्ता बना दिया

24 अक्टूबर को जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगेगा। 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 105 और उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली थी। लेकिन, शिवसेना की एक जिद्द ने न केवल राज्य की ...

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हिन्दुओं को भला-बुरा कह ‘कूल’ बनीं शबाना: बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, दूसरी बीवी सुभान अल्लाह

कुमारटुली से शुरू करते हैं। कुमारटुली से इसीलिए, क्योंकि वहाँ के लोगों के कारण बंगाल की दुर्गा पूजा में वो रौनक आती है, जो शायद ही कहीं और रहती हो। नार्थ कोलकाता के शोभाबाजार के पास स्थित कुमारटुली में ही वो लोग रहते हैं, जो माँ दुर्गा की कई भव्य ...

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महाराष्ट्र और हरियाणा में आखिर कौन जीता,कौन हारा

राजेश श्रीवास्तव महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के नतीजों की अगर ठीक से व्याख्या की जाए तो एक बात तो साफ हो जाती है कि वहां भारतीय जनता पार्टी की जीत नहीं हुई है। यह बात दूसरी है कि सरकार वहां भाजपा की ही बनेगी। लेकिन एक वाक्य में इन ...

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‘हम इतिहास से सबक नहीं सीखते’

प्रखर श्रीवास्तव कुछ ऐसा ही धोखा किया गया था 83 साल पहले स्वामी श्रद्धानंद के साथ… मैं यहां कमलेश तिवारी और स्वामी श्रद्धानंद की तुलना नहीं कर रहा, दोनों में बहुत अंतर है… मैं सिर्फ धोखेबाज़ी, दगाबाज़ी और गद्दारी के एक घटनाक्रम को समझाने की कोशिश कर रहा हूं… 2019 ...

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गांधी हत्याकांड पर बड़ा खुलासा : “जलनखोर” नेहरू की साज़िश में फंसे वीर सावरकर!

प्रखर श्रीवास्तव सेक्युलर, लिबरल, वामियों का ये कहना है कि वीर सावरकर को इसलिए भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वो महात्मा गांधी हत्याकांड के अभियुक्त थे। ये और बात है कि सावरकर 1949 में ही गांधी हत्याकांड में बरी हो गए थे। लेकिन आज जो मैं ऐतिहासिक तथ्य देने ...

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राजगोपालाचारी और अम्बेडकर के सामने सावरकर की ब्रिटिशपरस्ती कितनी गाढ़ी रही होगी?

के विक्रम राव विनायक सावरकर को भारत रत्न देने का महज दो कारणों से विरोध हो रहा है| उन्होंने अंडमान जेल से रिहाई चाही थी और बर्तानवी सरकार से सहकार की इच्छा व्यक्त की थी| प्रश्न यहाँ यह है कि मिलते जुलते अपराधों के लिए विषम दण्ड प्रावधान अपनाना नाइंसाफ़ी ...

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जिस देश की 60 फीसदी जनता 3 आना में गुजारा करती थी, वहीं नेहरु का खर्च 25 से 30 हजार के बीच था

अभिषेक उपाध्याय विपक्ष का मतलब क्या होता है? इसे समझने के लिए राम मनोहर लोहिया को समझना होगा। आज 12 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि है। पर वो तारीख थी 21 अगस्त 1963, नेहरू इस देश के प्रधानमंत्री थे। लोहिया विपक्ष में थे। नेहरू सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया ...

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जन्मदिन विशेष: ऐसा रहा है पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का जीवन, भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में अतुलनीय योगदान

15 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में बेहद खास आज के ही दिन हुआ था अब्दुल कलाम का जन्म भारतीय इतिहास में 15 अक्टूबर का दिन बेहद खास है. भारत को मिसाइल और परमाणु शक्ति संपन्न बनाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजी अब्दुल कलाम आज के ही दिन जन्मे थे. ...

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गांधी प्रासंगिक हैं या गांधी के नाम पर सियासत..!

प्रभात रंजन दीन आज पूरा देश महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। भाजपा कुछ अधिक ही उत्साही है। भाजपा शासित केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारें गांधी के लिए ऐसे फिदा हैं, जैसे गांधी के साथ उनका कालजयी नाता रहा है। बेचारे कांग्रेसी ही अब हाशिए पर ...

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आखिर बिहार का दोष क्या है.?

“ओ भैये, खोते दे पुतर डांग फेरनी है मैं तेरे ते” “नाही बाबू जी ग़लती हो गया, अबकी बार नही होगा।” पहला वाक्य एक पंजाबी अमीर जादे का है, दूसरा बिहार के एक प्रवासी मजदूर का। दरअसल हरियाणा, पंजाब या और कोई भी जगह हो बिहारियों को गाली बना दिया ...

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पत्रकारिता छोड़ ब्याह कराने वाले बिचौलिए की भूमिका में आ गए हैं रवीश बाबू…

प्रीति कमल रवीश कुमार पत्रकारिता का एक जाना-माना नाम है। मैग्सेसे भी जीत चुके हैं। लेकिन अब वे इस प्रोफ़ेशन को छोड़ने का मन बना चुके हैं। कैसे, क्यों और काहे? क्योंकि रवीश कुमार ने जयपुर में आयोजित टॉक जर्नलिज़्म कार्यक्रम में कुछ ऐसी बातें कहीं, जो एक पत्रकार नहीं ...

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बुद्ध-महावीर के स्थल से उस लड़की के गिड़गिड़ाने की आवाज़… आपके कानों तक पहुँची क्या?

अनुपम कुमार सिंह “भैया, मुझे अपनी छोटी बहन समझ कर माफ़ कर दीजिए। छोड़ दीजिए।” “बहुत बदनामी हो जाएगी। छोड़ दीजिए भैया।” इंसानी खाल में छिपे भेड़ियों से घिरी एक बच्ची बस इतना ही बोलती रही। उस पर टूटने वाले दरिंदे मंगल ग्रह से नहीं आए थे। वे भी उसी ...

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आतंक का एक मजहब है: कट्टरपंथी इस्लाम… एक ने स्वीकारा, आप भी स्वीकारिए

अजीत भारती ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान बहुत सी चीजें कही गईं, दिखीं और दिखाई गईं। मोदी के लिए एक भीड़ आई थी, जिसे कुछ कुख्यात पत्रकार रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों की भीड़ सदृश बताते हुए लेख लिखते पाए गए। फर्क बस यही है कि ऐसे पत्रकार अब इतना नीचे ...

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