नीलेश द्विवेदी जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद बीते महीने नई सरकारों का गठन हुआ है, उनमें मध्य प्रदेश की स्थिति जितनी दिलचस्प पहले थी उतनी ही अब भी बनी हुई है. राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की है. ...
Read More »कही-अनकही सचकही
विपक्ष ही नहीं, 2019 में पीएम मोदी का मुकाबला मोदी से भी है
पाणिनि आनंद अकबर ने बीरबल से एकबार कहा था कि वो कागज़ पर बनी एक लकीर को बिना काटे या मिटाए छोटा करके दिखाए. बीरबल ने उस लकीर के समानान्तर एक बड़ी लकीर खींच दी और इस तरह अकबर की लकीर छोटी हो गई. दरबार के रंकों के सामने पेश ...
Read More »राहुल गांधी : ‘पप्पू’ से हुए परिपक्व
हिमांशु शेखर राहुल गांधी पहला लोकसभा चुनाव 2004 में जीते थे. भारत के सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद उनके राजनीतिक प्रशिक्षण में अपेक्षाकृत बहुत अधिक वक्त लगा. हालांकि, बतौर नेता राहुल गांधी के शुरुआती दस सालों में उनकी ही पार्टी कांग्रेस की सरकार केंद्र में रही. लेकिन ...
Read More »‘ये आतंकवादी भारत के ही नहीं, इस्लाम और मुसलमानों के भी दुश्मन हैं’
डॉ. वेद प्रताप वैदिक राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कमाल का काम कर दिखाया है। उसने जिन 10 आतंकवादियों को पकड़ा है, अगर वह उन्हें नहीं पकड़ती तो नया साल भारत के लिए बहुत बुरा साबित होता। दिल्ली और बाहर की 17 जगह छापे माकर उसने जो विस्फोटक सामग्री बरामद की ...
Read More »BLOG: मुस्लिम समुदाय के नाम खुला ख़त
प्रकाश नारायण सिंह क्रिकेट और सियासत से लेकर गांव के चोरों तक में ‘दूसरा’ बेहद महत्वपूर्ण है. चलिए आपको पहले क्रिकेट के ‘दूसरा’ का मतलब बताते हैं. ऑफ स्पिन गेंदबाज जब लेग साइड से गेंद को स्पिन कराता है तो इसे ‘दूसरा’ कहा जाता है. पाक के गेंदबाजों ने इस ...
Read More »‘भाजपा के लिए ब्लैकमेलर रामविलास पासवान अब सिर्फ़ गड्ढा हैं’
दयानंद पांडेय तो भाजपा तीन राज्यों में अपनी करारी हार से सचमुच डर गई है । उसे अपने आप पर भरोसा नहीं रह गया है । तभी तो मतलब के यार रामविलास पासवान के आगे झुक गई है । ब्लैकमेलर और राजनीतिक मौसम विज्ञानी यानी गिरगिट की तरह रंग बदलने ...
Read More »काबुल, जो दिल्ली में बसता है
प्रदीपिका सारस्वत दुकानों के साइन बोर्ड यहां फारसी में लिखे गए हैं, फिर चाहे वह जनरल स्टोर हो या फिर डेंटिस्ट का क्लीनिक. कई दुकानों का नाम भी अफग़ान शहरों के नाम पर हैं, कहीं बल्क़ रेस्टोरेंट है तो कहीं हेरात जनरल स्टोर, कहीं मज़ार रेस्टोरेंट तो कहीं काबुल सुपर ...
Read More »क्या भाजपा और संघ योगी आदित्यनाथ को नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहे हैं?
हिमांशु शेखर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अब तक के कार्यकाल में कुछ बातों के लिए उनकी तारीफ होती है तो कुछ बातों के लिए उन्हें अपने ही राज्य में आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. जिस वक्त वे मुख्यमंत्री बने थे, उस वक्त यह कहा जा ...
Read More »अयोध्या विवाद हिंदू बनाम मुस्लिम के साथ-साथ हिंदू बनाम हिंदू भी है
कृष्ण प्रताप सिंह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को आप अब तक हिंदुओं और मुसलमानों के बीच का विवाद ही मानते रहे हैं तो अब अपनी इस धारणा को सुधार लीजिए. सच्चाई यह है कि यह हिंदू बनाम हिंदू भी है और मुसलमान इससे अलग हो जाएं तो भी ...
Read More »क्या अब भाजपा कांग्रेस की चुनावी चौसर पर चल रही है?
नीलेश द्विवेदी पिछले साल अप्रैल से जून के बीच मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हुए किसान आंदोलन पूरे देश में सुर्ख़ियां बने थे. आंदोलनाें में दो मांगें प्रमुख थीं. पहली – किसानों को उनकी फ़सलों के सही दाम मिल जाएं. दूसरी- उनके कर्ज़ माफ़ कर दिए जाएं. तब महाराष्ट्र के ...
Read More »किसान कर्ज माफी: जितना कर्ज लेते हैं किसान, उससे डेढ़ गुनी रकम डुबा देते हैं धन्नासेठ
पीयूष बबेले नई दिल्ली। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम में किसानों की कर्ज माफी के ऐलान के साथ ही देश में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि किसानों का कर्ज माफ किया जाना अच्छा आर्थिक फैसला है या नहीं. भारतीय रिजर्व बैंक का स्पष्ट मत है कि किसानों ...
Read More »पांच सबक जो भाजपा के लिए हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों में छिपे हैं?
हिमांशु शेखर पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी अलग रहे. 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विधानसभा चुनावों में भाजपा को लगातार कामयाबी मिली थी. दिल्ली, बिहार और पंजाब को अपवाद मान लें तो 2014 के बाद हुए अधिकांश ...
Read More »पांच सबक जो कांग्रेस पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से ले सकती है
हिमांशु शेखर 2014 में केंद्र की सत्ता से बेदखल होने के बाद पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे सुखद नतीजे लेकर आए हैं. इन नतीजों की वजह से वह 2019 के लोकसभा चुनावों के तकरीबन छह महीने पहले एक ऐसी पार्टी के तौर पर दिखने लगी ...
Read More »1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए
सिद्धार्थ वरदराजन 1984 में सिखों के नरसंहार में कांग्रेस पार्टी की संलिप्तता को नकाराने की राहुल गांधी की कोशिश से भी ज्यादा आघातकारी सिर्फ एक चीज है- 34 वर्षों से आजाद भारत के सबसे जघन्य अपराधों में एक पर पर्दा डालने की कोशिशों के सह-अपराधी होने के बाद हम में ...
Read More »रूह कंपाने वाला 1984 का सिख नरसंघार : ‘ इन कांग्रेसियों ने मेरे पिता को जलाने के लिए इंस्पेक्टर से मांगी थी माचिस’
नई दिल्ली। साल 1984 में दिल्ली में हुए सिख दंगा मामले में पीड़ितों को 34 साल बाद इंसाफ मिला तो आंखों में जीत की खुशी के साथ-साथ जहन में वो मंजर फिर से ताजा हो गया जब दंगाईयों की भीड़ ने उनके अपनों को उनके सामने ही मार डाला था. दंगों का ...
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