Thursday , April 18 2019

हमारे कॉलमिस्ट

कमजोर प्रत्याशी उतार कांग्रेस और सपा ने आसान कर दी राजनाथ की राह

राजेश श्रीवास्तव लखनऊ । मंगलवार को भाजपा की ओर से लखनऊ से नामांकन करने जा रहे राजनाथ सिंह के नामांकन जुलूस में उमड़ा जनसैलाब यह नारा गढ़ रहा था कि कहां फंसे हो चक्कर में, कोई नहीं है टक्कर में। उनके इस नारे पर शाम होते-होते समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ...

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पुरुषों के बराबर वोट देने वाली भारतीय महिलाओं की राजनीतिक हैसियत न के बराबर क्यों है?

प्रदीपिका सारस्वत घर हो या कार्यक्षेत्र, भारत में लैंगिक असमानता की जड़ें बहुत गहरी हैं. पर चुनाव एक ऐसा क्षेत्र है जहां महिलाओं ने अपनी मौजूदगी का न सिर्फ़ अहसास कराया है बल्कि बदलाव लाने में एक बड़ी भूमिका भी निभाई है. भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर लिखे ...

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क्या लालकृष्ण आडवाणी के प्रधानमंत्री बनने की अब भी कोई संभावना बची है?

हिमांशु शेखर भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को इस बार टिकट नहीं मिला. लंबे समय से उनकी सीट रहे गांधीनगर से अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उम्मीदवार हैं. कहा जा रहा है कि लालकृष्ण आडवाणी की सियासी पारी पर अब विराम लग गया है. जिस दिन ...

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बलराज साहनी शायद अकेले अभिनेता होंगे जो मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने पर जेल भेजे गए थे

दीपक महान यूं तो हिंदी फिल्मों में एक से एक बेहतरीन अदाकार हुए हैं, लेकिन ऐसे कम ही रहे जिन्होंने परदे पर वो किरदार जिंदा किए जिनसे हम रोजाना दो-चार होते हैं. इन अभिनेताओं का नाम सोचने पर यकीनन बलराज साहनी ऐसा नाम होंगे जिनके बिना हम आगे नहीं बढ़ ...

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इंदिरा गांधी और हेमा मालिनी के गेहूं का गठ्ठर उठाने में क्या फर्क है?

दुष्यंत कुमार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी इन दिनों अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा में अपने चुनाव प्रचार को लेकर चर्चा में हैं. बीते 31 मार्च को प्रचार अभियान शुरू करते हुए उन्होंने एक के बाद एक कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर ...

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1989 का वह आम चुनाव कई मायनों में इस बार के चुनाव जैसा ही था

अनुराग भारद्वाज आम चुनाव में अब ज़्यादा समय नहीं बचा है. आश्चर्यजनक रूप से इसमें मुद्दे और हालात वही दिख रहे हैं जो 30 साल पहले हुए चुनाव में थे. 1989 में हुआ आम चुनाव भारतीय राजनीति के इतिहास ख़ास मुक़ाम रखता है. यहां से राजनीति हमेशा के लिए एक ...

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क्यों कश्मीर में विकास की सबसे अहम परियोजना वहां के लोगों के लिए बुरा सपना बन गई है

सुहैल ए शाह कश्मीर घाटी में लगभग पिछले एक दशक से लोग राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाइवे)- 44 पर चल रहे काम के खत्म होने का इंतज़ार कर रहे थे. यह वाजिब भी था. इस परियोजना का मकसद था लोगों के लिए सफर को बेहतर बनाना. कश्मीर में पिछले तीन दशक ...

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भाजपा ने बीते घोषणा पत्र के केवल 34 फीसद वादे ही पूरे किये

भाजपा ने 8वीं बार किया राम मंदिर, धारा 37० और यूनिफार्म सिविल कोड का वादा जरा जानिये, भाजपा का बीता संकल्प पत्र कितना खरा भाजपा ने बीते चुनाव में 346 वादे किये थ्ो। अब जब सरकार चुनाव में आ गयी है तो उसके पुराने वादों को कसौटी पर कसने की ...

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क्यों मुलायम ने अखिलेश यादव के लिए न उगल पाने और न ही निगल पाने वाली स्थिति पैदा कर दी है

गोविंद पंत राजू समाजवादी पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों पशोपेश में हैं. इस पशोपेश की वजह हैं उनके पिता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव. जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने यादव परिवार ...

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तो क्या विपक्ष नरेंद्र मोदी को वाक ओवर दे चुका है

दयानंद पांडेय अब तो बनारस से भाजपा ने नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी घोषित कर दी है। समूचे विपक्ष को मिल कर कोई एक बड़ा नाम संयुक्त रूप से मोदी के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारना चाहिए। भले वह हार जाए , ज़मानत ज़ब्त हो जाए पर समूचे विपक्ष की तरफ से चुनौती ...

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बढ़ियां योजनाएं थीं तो उन्हें बताइये,अनर्गल प्रचार क्यों

राजेश श्रीवास्तव कॉलम पढ़ने के पहले आपको बीते पांच साल पहले जाना होगा। जब मनमोहन सरकार के अंतिम चरण में नरेंद्र मोदी व भाजपा के दिग्गजों ने कसाब, धर्म, श्मशान, कब्रिस्तान आदि की खूब चर्चा अपने भाषणों में की थी और जनता ने उनका यह समझकर बाहें फैलाकर स्वागत किया ...

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BLOG: 48 साल पुरानी काठ की हांडी फिर चढ़ा रही है कांग्रेस

भूख सबसे पहले दिमाग खाती है उसके बाद आंखें फिर जिस्म में बाकी बची चीजों को (नरेश सक्सेना)   भूख क्या है? इसके कई जवाब हैं सबसे ऊपर व्यवस्था का जवाब है   भूख को मिटाने के लिए हर सरकार के पास हैं वादे वादे स्वादिष्ट होते हैं हिंदू-मुस्लिम सब ...

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आधा शेर : एक राजनीतिक शेर जो खुद राजनीति का शिकार हो गया

गायत्री आर्य इस पुस्तक के अध्याय ‘अधजला शव’ का एक अंश: ‘गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने राव के सबसे छोटे बेटे प्रभाकर को सुझाव दिया कि पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाना चाहिए. लेकिन परिवार की प्राथमिकता दिल्ली थी. राव तीस साल से भी अधिक समय आंध्र प्रदेश ...

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‘जितनी जिंदगियां बचाने के लिए मसूद अजहर को किया गया था रिहा, उसने ले ली हैं अब तक उससे अधिक जानें’

सुरेन्द्र किशोर वो दिसंबर 2001 में भारत के संसद भवन पर भी हमला करवाने का दुःसाहस (हिमाकत) कर चुका है. पता नहीं, वो अभी आगे और कितनों की जान लेगा! वैसे उन कुछ भारतीय लोगों से भी उसे ताकत मिलती है जो यहां के विश्वविद्यालयों में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ ...

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‘कश्मीर अब समस्या नहीं बीमारी का रुप ले चुका है, सर्जिकल स्ट्राइक पाक में नहीं भारत में हो’

दयानंद पांडेय कश्मीर अब एक समस्या नहीं , एड्स और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के रूप में हमारे सामने उपस्थित है। इस का इलाज आसान नहीं हैं। जो लोग कश्मीर समस्या का हल बातचीत से करने की बात करते हैं , उन को दरकिनार कर कड़ी और बड़ी सैनिक कार्रवाई ...

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