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अमरमणि त्रिपाठी कहां गए किसी को पता नहीं? कोर्ट ने फरार घोषित किया, कुर्की का आदेश

अमरमणि त्रिपाठी कहां गए किसी को पता नहीं? कोर्ट ने फरार घोषित किया, कुर्की का आदेशपूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी 25 अगस्त को रिहा होने के बाद कहां गए पुलिस को यह पता नहीं है। अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपहरण के 22 साल पुराने मामले में उन्हें फरार घोषित कर दिया है।

इसके साथ ही सीआरपीसी-82 के तहत कुर्की का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि अमरमणि की फरारी का इश्तेहार स्थानीय समाचार-पत्रों में प्रकाशित कराने के साथ ही इसकी प्रति अगली तारीख 16 नवंबर को पेश करें।

पुलिस की कार्यशैली को भी कोर्ट ने कठघरे में खड़ा किया। इस मामले में अब तक पुलिस की कार्रवाई को लेकर जो दलील दी गई उसमें कहा गया कि अमरमणि की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। मगर वह पकड़ में नहीं आए। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए पुलिस अधीक्षक बस्ती पर सख्त टिप्पणी की है।

प्रभावशाली के सामने किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाती है पुलिस

कोर्ट ने पुलिस की कार्य प्रणाली को लेकर पुलिस अधीक्षक पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उनकी कार्यप्रणाली इस केस में आपत्तिजनक है। गरीब अपराधी के मामले में स्थानीय पुलिस पूरी तत्परता से अपेक्षा से अधिक पैरवी करती है।

जबकि प्रभावशाली दुर्दांत अपराधियों के मामले में पुलिस किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाती है। पूर्व में 16 अक्टूबर की पूर्व तिथि पर भी अमरमणि को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने का आदेश पारित किया गया था। कोर्ट के आदेश की एक-एक प्रति प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी यूपी को भी भेजने को आदेशित किया गया है।

इस मामले में वरिष्ठ जेल अधीक्षक जिला कारागार गोरखपुर से प्राप्त आख्या से पता चलता है कि कारागार प्रशासन ने अमरमणि को 25 अगस्त को रिहा कर दिया है। इसके बावजूद वह तारीख पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। आरोपी अमरमणि के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। पिछली सुनवाई में एसपी बस्ती को स्पेशल टीम बनाकर अमरमणि की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया था।

इससे पहले 16 सितंबर को एमपी-एमएलए कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि डिप्रेशन के आधार पर अमरमणि को कोर्ट में पेशी से छूट नहीं मिलेगी। इसी मामले में कोर्ट ने दो अन्य फरार आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने के संबंध में कहा था कि पुलिस की अकर्मण्यता के कारण अभी तक अभियुक्तगण फरार हैं। न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। आरोपी शिवम उर्फ रामयज्ञ व नैनीश शर्मा के खिलाफ स्थायी गैर जमानती वारंट जारी है। कोतवाल को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया था।

16 नवम्बर को पेश करना ही होगा
अपहरण केस में गैर हाजिर दूसरे आरोपियों में नैनीश शर्मा, शिवम उर्फ रामयज्ञ को फरार घोषित करने का आदेश भी पुलिस को दिया है। अब पुलिस को अमरमणि को 16 नवंबर को कोर्ट में पेश करना ही होगा। सीआरपीसी 82 की कार्रवाई के तहत कोतवाली पुलिस अमरमणि के घर पर फरारी का नोटिस चस्पा करेगी। उसके बाद भी अमरमणि सरेंडर नहीं करते तो उनके घर की 83 के तहत कुर्की भी हो सकती है।

लगातार समन भेज रही थी कोर्ट
अपहरण में अमरमणि त्रिपाठी सहित तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद न्यायालय की ओर से उन्हें लगातार समन भेजा जा रहा है। लेकिन अमरमणि बीमारी का बहाना बनाकर कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया।

लखनऊ के घर से मिला था अपहृत किशोर
छह दिसंबर वर्ष 2001 में बस्ती कोतवाली क्षेत्र के गांधीनगर के धर्मराज गुप्ता के बेटे का अपहरण हो गया था। तत्कालीन विधायक अमरमणि त्रिपाठी के लखनऊ स्थित आवास से पुलिस ने धर्मराज के बेटे को बरामद किया था। इस मामले में पूर्व विधायक समेत नौ आरोपित हैं। इनमें पूर्व विधायक अमरमणि त्रिपाठी, नैनीश शर्मा और शिवम उर्फ रामयज्ञ कोर्ट से गैरहाजिर चल रहे हैं। जिससे मुकदमे की कार्यवाही लंबित है।

पहले ही जारी हो गया था एनबीडब्ल्यू
इस मामले में आरोपी अमरमणि के खिलाफ गैर जमानती वारंट पहले ही जारी किया जा चुका है। पिछली सुनवाई में एसपी बस्ती को स्पेशल टीम बनाकर अमरमणि त्रिपाठी की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया था। इससे पूर्व 16 सितंबर को एमपी-एमएलए कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि डिप्रेशन के आधार पर अमरमणि किो कोर्ट में पेशी से छूट नहीं मिलेगी।

इसी मामले में कोर्ट ने दो अन्य फरार आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने के संबंध में कहा था कि पुलिस की अकर्मण्यता के कारण अभी तक अभियुक्तगण फरार हैं। न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। आरोपी शिवम उर्फ रामयज्ञ व नैनीश शर्मा के खिलाफ स्थायी गैर जमानती वारंट जारी है। कोतवाल को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया था।

बीआरडी को भी पता नहीं कहां गए अमरमणि
10 साल से बीआरडी में भर्ती रहे पूर्व मंत्री अमरमणि इन दिनों लापता हैं। उनका इलाज मानसिक रोग विभाग में चल रहा था। वह मेडिकल कालेज के प्राइवेट वार्ड में भर्ती थे। उनको लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर चुप्पी साधे हुए हैं। पूर्व मंत्री के बारे में डॉक्टर कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बुधवार को फिर एमपी-एमएलए कोर्ट में अपहरण के मामले में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूर्व मंत्री को गिरफ्तार कर पेश करने का निर्देश दिया था। बताया जा रहा है कि उसके बाद से अमरमणि बीआरडी छोड़ दिए हैं। हालांकि कॉलेज प्रशासन कुछ भी कहने से इनकार कर रहा।

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