गोंडा समेत बजाज एनर्जी के 5 उत्पादन गृहों का पावर परचेज एग्रीमेन्ट हुआ समाप्त

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लखनऊ। योगी सरकार के निर्देश पर उप्रपावर कारपोरेशन द्वारा हाई प्रोफाइल बजाज एनर्जी के 90 मेगावाट के 5 उत्पादन गृहों उतरौला, (बलरामपुर), खम्भरखेरा (लखीमपुर खीरी), बरखेडा (पीलीभीत), कुन्दर्की (गोण्डा), मकसूदपुर (शाहजहाॅंपुर) जिनकी कुल क्षमता 450 मेगावाट थी के पावर परचेज एग्रीमेन्ट (पीपीए) को समाप्त करने का नोटिस जारी कर दिया है।  18 जुलाई के बाद इन सभी उत्पादन गृहों के पावर परचेज एग्रीमेन्ट से पावर कारपोरेशन मुक्त हो जायेगा। पावर कारपोरेशन द्वारा लिये गये इस ऐतिहासिक निर्णय से प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं में खुशी की लहर है।
गौरतलब है कि उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद इन पावर हाउसों की मंहगी बिजली के विरोध में लम्बे समय से संघर्ष कर रहा था। यूपी में इस हाई प्रोफाइल घटना क्रम के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा व सदस्य एस0 के0 अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी चर्चा की और कहा चूॅंकि बिजली कम्पनियों द्वारा जो वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) नियामक आयोग में दाखिल किया गया है उसमें कम्पनियों द्वारा कुल बिजली खरीद की वर्ष 2017-18 के लिये जो औसत लागत निकाली गयी है वह रू0 4.11 प्रति यूनिट है जिसमें इन पांचों उत्पादन गृहों से जो कुल लगभग 1773 करोड की बिजली खरीद प्रस्तावित थी उसकी औसत लागत रू0 7.22 प्रति यूनिट है ऐसे में कल के बाद जब इन उत्पादन गृहों का पावर परचेज एग्रीमेन्ट समाप्त हो जायेगा तो आयोेग एआरआर में बदलाव कराये क्योंकि इससे कुल औसत लागत में कमी आयेगी और उसका फायदा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को दिया जाये।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा काफी लम्बे समय से इन सभी उत्पादन गृहों की मंहगी बिजली का खामियाजा प्रदेश की जनता केा भुगतना पड रहा था पावर कारपोरेशन के उच्च प्रबन्धन द्वारा लिये गये सराहनीय फैसले से आने वाले समय में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी आयेगी। पावर कारपोरेशन द्वारा बजाज एनर्जी के पांचों उत्पादन गृहों को अलग अलग दी गयी नोटिस में स्वतः यह माना गया है कि इन सभी पावर हाउसों से रू0 7.11 प्रति यूनिट से लेकर रू0 8.28 प्रति यूनिट तक बिजली की दर आ रही है जो बहुत ही अधिक हैं। उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन व राज्य सरकार से पुनः यह मांग उठायी है कि ऐसे सभी उत्पादन गृहों के पीपीए खारिज किये जायें जो मंहगी बिजली पैदा कर रहे हैं।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अब नियामक आयोग के लिए आसान होगा वह प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के विषय पर प्रभावी कदम उठाते हुए प्रदेश के घरेलू एवं कृषि की दरों में कमी करायी जाये। जिससे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं में इस बात का संदेश जाये कि मंहगी बिजली के उत्पादन गृहों की मंहगी बिजली का खामियाजा अब प्रदेश की जनता को नही भुगतना पडेगा।
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