नरेश अग्रवाल ने पीएम मोदी के लिए जातिसूचक शब्द प्रयोग किया है, कहा मोदी तो ‘तेली’ हैं

लखनऊ। चलो बताओ सब लोग, नरेश अग्रवाल को जानते हो, अगर हां तो अच्छी बात है, अगर नहीं जानते तो और भी अच्छी बात है। उनमे जानने लायक कुछ खास है भी नहीं सिवाय इसके कि वो समाजवादी पार्टी के सांसद हैं, राज्यसभा में, दूसरा लोग उनको जाने इसके लिए वो ऐसे बयान देते हैं जिस से वो चर्चा में रहें, ये दो ही बातें गौर करने लायक हैं बाकी तो वो आम नेता की तरह ही हैं। तो अब आप ये पूछो कि अग्रवाल जी के बारे में इतनी भूमिका बांधने की क्या जरूरत थी, तो इसका जवाब ये है कि खुद को जानने वालों की लिस्ट में शुमार करने के लिए अग्रवाल साहब ने फिर से एक ऐसी बात बोली है जिस पर विवाद खड़ा हो गया है, उन्होंने प्रधानमंत्री को लेकर कुछ ऐसा कह दिया है जिस से लोगों की भावनाएं आहत हो गई हैं. विरोध शुरू हो गया है।

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे, वैश्य समाज की बैठक का कार्यक्रम था, इस दौरान वो भाषण देने लगे, बातों ही बातों में समाज और जाति तक आ गए, कहने लगे कि वैश्य समाज के लिए अमित शाह कुछ कर सकते हैं, लेकिन मोदी नहीं, क्योंकि मोदी तेली  हैं, उनका इतना कहना था कि सभा में हंगामा मच गया, वहां पर मौजूद लोगों ने इस बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि वो अपना बयान वापस लें, लेकिन अग्रवाल कहां मौका चूकने वालों में से हैं, उनको पता है कि उनका बयान उन्हे कई दिनों तक चर्चा में रखेगा। मोदी के लिए जातिसूचक शब्द का प्रयोग करने के बाद भी अग्रवाल अपने बयान पर कायम रहे।

नरेश अग्रवाल ने कहा कि ये हमारे देश की सच्चाई है, आप जातियों से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।  अपने बयान को सही ठहराने के लिए अग्रवाल ने तमाम तर्क दिए। वो कहते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया, अगर गलत नहीं कहा तो सभा में मौजूद लोगों ने ही उनका विरोध क्यों शुरू कर दिया, वैश्य समाज की इस सभा में जीएसटी को लेकर व्यापारी वर्ग ने अपना दुख बताया, यानि सरकार से दुखी हैं वो समाज, उसके बाद भी मोदी के लिए जातिसूक शब्द का प्रयोग करने पर अग्रवाल की खिंचाई की, उनका विरोध किया, कहा कि इस शब्द को वापस लो, लेकिन अग्रवाल तो अश्वत्थामा की तरह हैं, वो बयान देना जानते हैं उसे वापस लेने की कला उनके पास नहीं है। वसे वापस लेने में कोई फायदा भी नहीं है,

सभा में मौजूद ताम लोगों ने अग्रवाल के इस बयान की निंदा की, लेकिन अग्रवाल तो तरकश से निकले तीर की तरह अपनी बातों की रवानी में बहते गए, उनकी कोशिश अच्छी है कि वो खबरों में बनें रहे, कुछ दिनों पहले ही उन्होंने कुलभूषण जाधव के लिए विवादित बयान दिया था। कहा कि पाकिस्तान ने जाधव को आतंकी मान लिया है तो उसी तरह से व्यवहार करेगा, वहीं राम मंदिर को लेकर भी अग्रवाल ने बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कुछ लोगों ने खुद को हिंदू धर्म का ठेकेदार मान लिया है। बहरहाल हर नेता के अंदर ये बीमारी होती है, वो खबरों में बना रहना चाहता है, नहीं तो उसे पहचानेगा कौन, ऐसे ही सवाल उठते रहेंगे कि फलाने को जानते हो, कोई रेफरेंस नहीं होगा, अग्रवाल साहब के पास बहुत से रेफरेंस हो गए हैं, मोदी को जातिसूचक शब्द कहने वाले, राम मंदिर और कुलभूषण जाधव पर विवादित बयान देने वाले। फिलहाल आप वीडियो देखिए

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