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एक दिन में 27 हजार लोगों ने देखा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’, भीड़ बढ़ी तो बंद करनी पड़ी टिकट विंडो

राजपीपला। गुजरात के नर्मदा जिले में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देखने के लिये शनिवार को रिकॉर्ड 27000 लोग पहुंचे. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री द्वारा 31 अक्टूबर को सरदार पटेल के स्मारक का उद्घाटन किया गया था और एक नवंबर को आम लोगों के लिये इसे खोला गया, उसके बाद से एक दिन में यहां आने वाले लोगों की यह संख्या सबसे ज्यादा थी. केवड़िया में सरदार सरोवर बांध के पास एक टापू पर निर्मित इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर है और यह दुनिया में इस तरह की सबसे ऊंची मूर्ति है.

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पर्यटकों की भारी संख्या के कारण बंद करनी पड़ी टिकट विंडो
वहीं, शुक्रवार सुबह को करीब 15 हजार लोगों के पहुंचने के कारण टिकट विंडो भी बंद करनी पड़ गई थी. बताया जा रहा है कि लोगों की भीड़ इलनी अधिक बढ़ गई थी कि भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को भी बुलाना पड़ गया. मूर्ति में लगी उच्च गति वाली लिफ्ट की क्षमता प्रतिदिन 5,000 लोगों की है. यह लिफ्ट पर्यटकों को मूर्ति के अंदर बनी दर्शक दीर्घा तक लेकर जाती है. प्रदेश सरकार ने लोगों से कहा है कि वह इस पहलू को ध्यान में रखकर स्मारक के दौरे की योजना बनाएं. मूर्ति के अंदर 135 मीटर की ऊंचाई पर दर्शक दीर्घा है और एक बार में वहां 200 लोग रह सकते हैं. नर्मदा के जिलाधिकारी आरएस नीमाना ने शनिवार को 27 हजार दर्शकों के दौरे की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन को रविवार को यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है.

33 महीने में तैयार हुई ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’
इस मूर्ति का डिजाइन मशहूर मूर्तिकार राम वंजी सुतार ने तैयार किया है और इसे इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने करीब 30 अरब रुपये की लागत से तैयार किया है. वैसे तो इस प्रतिमा को तैयार करने में सामान्य तौर पर 8-10 साल लग जाते, लेकिन एलएंडटी ने इसे 33 माह में तैयार कर दिया. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के निदेशक मुकेश रावल ने मूर्ति निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती का जिक्र करते हुए कहा था, “सरकार पटेल एक दिग्गज व्यक्ति थे. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उनकी मुखाकृति, मुद्रा और हाव-भाव को सही तरीके से उकेरा जा सके.”

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कंपनी ने इस रणनीति से लिया काम
प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया, “इसके लिए कंपनी ने मूर्तिकार सुतार के साथ मिलकर काम किया और पहले 3 फुट और 30 फुट की प्रतिमा का नमूना तैयार किया और सार्वजनिक तौर पर गांव-गांव जाकर लोगों से परामर्श किया. अभिलेखागार की तस्वीरों से तस्वीरों को इकट्ठा कर टीम ने 2डी से 3डी छवि तैयार की और इस तरह से पटेल की मुखाकृति, हाव-भाव, कद-काठी का पूरा बायोमेट्रिक ब्योरा तैयार किया.”

पोशाक में मोड़ों को दर्शाना थी चुनौती 
परियोजना निदेशक रावल ने बताया, “सरदार पटेल की मूर्ति की पोशाक में मोड़ों को दर्शाना भी के चुनौती थी और इसे स्थिर ही नहीं दिखाना चाहिए था.” उन्होंने बताया, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को इस तरह से डिजाइन किया गया है यह तटीय क्षेत्रों में 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली हवाओं को सह सके. इस परियोजना के लिए चरणबद्ध तरीके से मंजूरी लेनी थी लेकिन कंपनी ने जोख़िम लेते हुए अक्सर बिना इंतजार किए काम आगे बढ़ाया.

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